घर से आइल बाटे बुलावा , मुनवा के छठियार बा !
दस दिन के छुट्टी दे दीं हुजूर, घर में इंतजार बा !
सावन में गइनी ना भादो में गइनी !
होली दिवाली हम जनबे ना कइनी !
गँउवा नगरिया देखे खातिर , कब से जियरा बेकरार बा !
दस दिन के छुट्टी दे दीं हुजूर, घर में इंतजार बा !
माई बोलावे बबुवा अइब कहिया !
बाबुजी कब से देखेलन रहिया !
धनिया के रोज आवेला फोनवा , तोहरा बिना फीका संसार बा !
दस दिन के छुट्टी दे दीं हुजूर, घर में इंतजार बा !
छुट्टी के कब से करीले निहोरा !
केतने महिना बितल असर ना थोरा !
वर्मा छोड़ी के जायब नोकरी , इहे राउर विचार बा !
दस दिन के छुट्टी दे दीं हुजूर, घर में इंतजार बा !
श्याम नारायण वर्मा
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Shyam Narain Verma
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Shyam Narain Verma
बताव कागा कहिया अइहें , परदेशी सजना हमार !
दूध भात खिआइबी तहके , उनुकर सुनाव समाचार !
नीन्दिया ना आवे सारी रतिया !
करवट बदलते बीतेला रतिया !
याद कइ कइके तड़पे छतिया !
फीका लागे सजल सोलहो श्रृगार !
बताव कागा कहिया अइहें , परदेशी सजना हमार !
रोज रोज बोलेल हमरे दुवारी !
संदेश बताके हर वेदना हमारी !
हो सके त साजन से कहिह ,
उनका बिना सूना लागे संसार !
नीन्दिया ना आवे सारी रतिया !
करवट बदलते बीतेला रतिया !
याद कइ कइके तड़पे छतिया !
फीका लागे सोलहो श्रृगार !
बताव कागा कहिया अइहें , परदेशी सजना हमार !
केतने दिनन से असरा लगवनी !
साजन के रहिया में अँखिया बिछवनी !
केतने वर्त अरू पूजा कईनी ,
वर्मा कब मिलिहें सजना हमार !
साजन के रहिया में अँखिया बिछवनी !
श्याम नारायण वर्मा -
Shyam Narain Verma
मानव जब दानव बन जाला , नर नारी के खा जाला !
बसता घर विरान हो जाला , के डाली घर में ताला !
दहशत भरल बा हर मोड़ पर , केहू जब कतहीं जाला !
पता ना कब कहाँ बम बरसी , बस नर संहार सुनाला !
कहीं रेल पटरी पुल उड़त बा , तड़पेला टोपी वाला !
रावण बन जन को ले जाते , चारों ओर होत हाला !
कोर्ट कचहरी चाहे संसद , बस ह डर के बोल बाला !
अब त के उबारी संकट से , रोवता बचावे वाला !
बलात्कार अपहरण आसान , रोवते चुप पटा जाला !
देश देश के लूटल चाहे , जबरी करे फौज वाला !
ऊपर भाई भाई नाता , मारे छुरा पड़ोस वाला !
वर्मा बचके जायीं कहँवा , हर जगह मारने वाला !
श्याम नारायण वर्मा