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  • Shyam Narain Verma 6:44 pm on April 28, 2012 Permalink | Reply
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    घर से आइल बाटे बुलावा , मुनवा के छठियार बा !
    दस दिन के छुट्टी दे दीं हुजूर, घर में इंतजार बा !
    सावन में गइनी ना भादो में गइनी !
    होली दिवाली हम जनबे ना कइनी !
    गँउवा नगरिया देखे खातिर , कब से जियरा बेकरार बा !
    दस दिन के छुट्टी दे दीं हुजूर, घर में इंतजार बा !
    माई बोलावे बबुवा अइब कहिया !
    बाबुजी कब से देखेलन रहिया !
    धनिया के रोज आवेला फोनवा , तोहरा बिना फीका संसार बा !
    दस दिन के छुट्टी दे दीं हुजूर, घर में इंतजार बा !
    छुट्टी के कब से करीले निहोरा !
    केतने महिना बितल असर ना थोरा !
    वर्मा छोड़ी के जायब नोकरी , इहे राउर विचार बा !
    दस दिन के छुट्टी दे दीं हुजूर, घर में इंतजार बा !
    श्याम नारायण वर्मा

     
  • Shyam Narain Verma 2:18 pm on April 20, 2012 Permalink | Reply
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    बताव कागा कहिया अइहें , परदेशी सजना हमार !
    दूध भात खिआइबी तहके , उनुकर सुनाव समाचार !
    नीन्दिया ना आवे सारी रतिया !
    करवट बदलते बीतेला रतिया !
    याद कइ कइके तड़पे छतिया !
    फीका लागे सजल सोलहो श्रृगार !
    बताव कागा कहिया अइहें , परदेशी सजना हमार !
    रोज रोज बोलेल हमरे दुवारी !
    संदेश बताके हर वेदना हमारी !
    हो सके त साजन से कहिह ,
    उनका बिना सूना लागे संसार !
    नीन्दिया ना आवे सारी रतिया !
    करवट बदलते बीतेला रतिया !
    याद कइ कइके तड़पे छतिया !
    फीका लागे सोलहो श्रृगार !
    बताव कागा कहिया अइहें , परदेशी सजना हमार !
    केतने दिनन से असरा लगवनी !
    साजन के रहिया में अँखिया बिछवनी !
    केतने वर्त अरू पूजा कईनी ,
    वर्मा कब मिलिहें सजना हमार !
    साजन के रहिया में अँखिया बिछवनी !
    श्याम नारायण वर्मा

     
  • Shyam Narain Verma 11:41 am on April 19, 2012 Permalink | Reply
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    मानव जब दानव बन जाला , नर नारी के खा जाला !
    बसता घर विरान हो जाला , के डाली घर में ताला !
    दहशत भरल बा हर मोड़ पर , केहू जब कतहीं जाला !
    पता ना कब कहाँ बम बरसी , बस नर संहार सुनाला !
    कहीं रेल पटरी पुल उड़त बा , तड़पेला टोपी वाला !
    रावण बन जन को ले जाते , चारों ओर होत हाला !
    कोर्ट कचहरी चाहे संसद , बस ह डर के बोल बाला !
    अब त के उबारी संकट से , रोवता बचावे वाला !
    बलात्कार अपहरण आसान , रोवते चुप पटा जाला !
    देश देश के लूटल चाहे , जबरी करे फौज वाला !
    ऊपर भाई भाई नाता , मारे छुरा पड़ोस वाला !
    वर्मा बचके जायीं कहँवा , हर जगह मारने वाला !
    श्याम नारायण वर्मा

     
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