दिन रात सुतब , ना करब कमाई !
बताव सईंया कइसे , करजवा भराई !
काम ना धाम , बस बड़े बड़े बतिया !
सुतल सुतल बीतेला सारी रतिया !
दोसरा के देखिके खाली करेल बड़ाई !
काम ना करब त कईसे चली गाड़ी !
कहिया ले नईहर के पहिनब साड़ी !
सब केहू आके हमके ताना सुनाई !
बताव सईंया कइसे , करजवा भराई !
टोला में सब केहू तोहरो करेला हिनाई !
तोहरा के सईंया हम केतना समझाई !
ऐ चाल से एक दिन खेत घर बेचाई !
बताव सईंया कइसे , करजवा भराई !
बताव सईंया कइसे , करजवा भराई !
बाप महतारी के बात ना मानेल !
हमरा के सजना कुछु ना जानेल !
वर्मा अबो से तबे सुधर होई भलाई !
बताव सईंया कइसे , करजवा भराई !
श्याम नारायण वर्मा
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Shyam Narain Verma
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Shyam Narain Verma
बताव सईंया कइसे , करजवा भराई !
दिन रात सुतब , ना करब कमाई !
बताव सईंया कइसे , करजवा भराई !
काम ना धाम , बसदिन रात सुतब , ना करब कमाई !
बताव सईंया कइसे , करजवा भराई !
काम ना धाम , बस बड़े बड़े बतिया !
सुतल सुतल बीतेला सारी रतिया !
दोसरा के देखिके खाली करेल बड़ाई !
काम ना करब त कईसे चली गाड़ी !
कहिया ले नईहर के पहिनब साड़ी !
सब केहू आके हमके ताना सुनाई !
बताव सईंया कइसे , करजवा भराई !
टोला में सब केहू तोहरो करेला हिनाई !
तोहरा के सईंया हम केतना समझाई !
ऐ चाल से एक दिन खेत घर बेचाई !
बताव सईंया कइसे , करजवा भराई !
बताव सईंया कइसे , करजवा भराई !
बाप महतारी के बात ना मानेल !
हमरा के सजना कुछु ना जानेल !
वर्मा अबो से तबे सुधर होई भलाई !
बताव सईंया कइसे , करजवा भराई !
श्याम नारायण वर्मा
बड़े बड़े बतिया !
सुतल सुतल बीतेला सारी रतिया !
दोसरा के देखिके खाली करेल बड़ाई !
काम ना करब त कईसे चली गाड़ी !
कहिया ले नईहर के पहिनब साड़ी !
सब केहू आके हमके ताना सुनाई !
बताव सईंया कइसे , करजवा भराई !
टोला में सब केहू तोहरो करेला हिनाई !
तोहरा के सईंया हम केतना समझाई !
ऐ चाल से एक दिन खेत घर बेचाई !
बताव सईंया कइसे , करजवा भराई !
बताव सईंया कइसे , करजवा भराई !
बाप महतारी के बात ना मानेल !
हमरा के सजना कुछु ना जानेल !
वर्मा अबो से तबे सुधर होई भलाई !
बताव सईंया कइसे , करजवा भराई !
श्याम नारायण वर्मा -
Shyam Narain Verma
थर थर काँपेला बदनवा , सजनवा घरे ना अइलन हो !
कइसे होई गेहूँ के दवनवा , विदेश जाके भूला गइलन हो !
उमड़ घुमड़ जब कहियो घिर आवें बदरा !
भीजी जाई गेहूँ सोची सूखेला कजरा !
धक धक करेला जियरवा , माया में अझुरा गइलन हो !
कइसे होई गेहूँ के दवनवा , विदेश जाके भूला गइलन हो !
कबसे कहेलन छुट्टी ले के आयब परसों !
पल पल बीतेला लागेला जइसे बरसों !
भीगी के खराब होई गलवा , फिर आके का होई हो !
कइसे होई गेहूँ के दवनवा , विदेश जाके भूला गइलन हो !
कइसे कइसे कटनी करवनी बनिहार से !
अब ले ना अइले असर ना पड़ल पुकार से !
वर्मा कहिये से करा के इंतजार , सनेहिया भूला गइलन हो !
कइसे होई गेहूँ के दवनवा , विदेश जाके भूला गइलन हो !
श्याम नारायण वर्मा