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  • Shyam Narain Verma 2:24 pm on May 3, 2012 Permalink | Reply  

    दिन रात सुतब , ना करब कमाई !
    बताव सईंया कइसे , करजवा भराई !
    काम ना धाम , बस बड़े बड़े बतिया !
    सुतल सुतल बीतेला सारी रतिया !
    दोसरा के देखिके खाली करेल बड़ाई !
    काम ना करब त कईसे चली गाड़ी !
    कहिया ले नईहर के पहिनब साड़ी !
    सब केहू आके हमके ताना सुनाई !
    बताव सईंया कइसे , करजवा भराई !
    टोला में सब केहू तोहरो करेला हिनाई !
    तोहरा के सईंया हम केतना समझाई !
    ऐ चाल से एक दिन खेत घर बेचाई !
    बताव सईंया कइसे , करजवा भराई !
    बताव सईंया कइसे , करजवा भराई !
    बाप महतारी के बात ना मानेल !
    हमरा के सजना कुछु ना जानेल !
    वर्मा अबो से तबे सुधर होई भलाई !
    बताव सईंया कइसे , करजवा भराई !
    श्याम नारायण वर्मा

     
  • Shyam Narain Verma 2:22 pm on May 3, 2012 Permalink | Reply  

    बताव सईंया कइसे , करजवा भराई ! 

    दिन रात सुतब , ना करब कमाई !
    बताव सईंया कइसे , करजवा भराई !
    काम ना धाम , बसदिन रात सुतब , ना करब कमाई !
    बताव सईंया कइसे , करजवा भराई !
    काम ना धाम , बस बड़े बड़े बतिया !
    सुतल सुतल बीतेला सारी रतिया !
    दोसरा के देखिके खाली करेल बड़ाई !
    काम ना करब त कईसे चली गाड़ी !
    कहिया ले नईहर के पहिनब साड़ी !
    सब केहू आके हमके ताना सुनाई !
    बताव सईंया कइसे , करजवा भराई !
    टोला में सब केहू तोहरो करेला हिनाई !
    तोहरा के सईंया हम केतना समझाई !
    ऐ चाल से एक दिन खेत घर बेचाई !
    बताव सईंया कइसे , करजवा भराई !
    बताव सईंया कइसे , करजवा भराई !
    बाप महतारी के बात ना मानेल !
    हमरा के सजना कुछु ना जानेल !
    वर्मा अबो से तबे सुधर होई भलाई !
    बताव सईंया कइसे , करजवा भराई !
    श्याम नारायण वर्मा
    बड़े बड़े बतिया !
    सुतल सुतल बीतेला सारी रतिया !
    दोसरा के देखिके खाली करेल बड़ाई !
    काम ना करब त कईसे चली गाड़ी !
    कहिया ले नईहर के पहिनब साड़ी !
    सब केहू आके हमके ताना सुनाई !
    बताव सईंया कइसे , करजवा भराई !
    टोला में सब केहू तोहरो करेला हिनाई !
    तोहरा के सईंया हम केतना समझाई !
    ऐ चाल से एक दिन खेत घर बेचाई !
    बताव सईंया कइसे , करजवा भराई !
    बताव सईंया कइसे , करजवा भराई !
    बाप महतारी के बात ना मानेल !
    हमरा के सजना कुछु ना जानेल !
    वर्मा अबो से तबे सुधर होई भलाई !
    बताव सईंया कइसे , करजवा भराई !
    श्याम नारायण वर्मा

     
  • Shyam Narain Verma 6:45 pm on April 28, 2012 Permalink | Reply
    Tags:   

    थर थर काँपेला बदनवा , सजनवा घरे ना अइलन हो !
    कइसे होई गेहूँ के दवनवा , विदेश जाके भूला गइलन हो !
    उमड़ घुमड़ जब कहियो घिर आवें बदरा !
    भीजी जाई गेहूँ सोची सूखेला कजरा !
    धक धक करेला जियरवा , माया में अझुरा गइलन हो !
    कइसे होई गेहूँ के दवनवा , विदेश जाके भूला गइलन हो !
    कबसे कहेलन छुट्टी ले के आयब परसों !
    पल पल बीतेला लागेला जइसे बरसों !
    भीगी के खराब होई गलवा , फिर आके का होई हो !
    कइसे होई गेहूँ के दवनवा , विदेश जाके भूला गइलन हो !
    कइसे कइसे कटनी करवनी बनिहार से !
    अब ले ना अइले असर ना पड़ल पुकार से !
    वर्मा कहिये से करा के इंतजार , सनेहिया भूला गइलन हो !
    कइसे होई गेहूँ के दवनवा , विदेश जाके भूला गइलन हो !
    श्याम नारायण वर्मा

     
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