गज़ल आ रूबाई
भोजपुरी के एगो काफ़ी समर्थ गीतकार, कवि, गजललेखक, साहित्य के सब विधा पर समान रूप से लेखनी चलावेवाला श्री दिनेश भ्रमर के कुछ भोजपुरी रचना दे तानी. भोजपुरी आ हिन्दी साहित्य पर बराबर अधिकार रखे वाला श्री दिनेश जी के कई गो रचना देश के विश्वविधालय के पाठ्यक्रम में भी लागल बा आउर बहुत किताब भी इहां के लिखले बानी. ज्योतिष पर भी इनकर काफ़ी अच्छा पकड बा. महाविधालय में कुछ दिन व्याख्याता पद पर काम कइला के बाद उहां के वर्तमान में खेती-बाडी के काम अपन आवास स्थान बगहा में रह के देख तानी.
भोजपुरी साहित्य में गजल आउर रूबाई के जगह दिवावे में इनकर महत्वपूर्ण नाम लेवल जाला. इनकर रचित कुछ निमन-निमन रचना अपना हिसाब से दे तानी अपनहूं लोगन के ई स्वच्छ-सुंदर आ शिष्ट रचना जरूर पसंद आई.
गजल
आंख में आके बस गइल केहू,
प्रान हमरो परस गइल केहू.
हमरे लीपल पोतल अंगनवां में,
बन के बदरा बरस गइल केहू.
गोर चनवा पै सांवर अंधेरा,
देखि के बा तरस गइल केहू.
फूल त कांट से ना कहलस कुछु,
झूठे ओकरा पे हंस गइल केहू.
कठ के जब बजल पिपिहरी तब,
बीन के तार कस गइल केहू.
रूबाई
मन के बछरू छ्टक गइल कइसे,
नयन गगरी ढरक गइल कइसे.
हम ना कहनी कुछु बयरिया से,
उनके अंचरा सरक गइल कइसे.
गजल
नजरिया के बतिया नजरिया से कहि द,
ना चमके सोनहुला किरनिया से कहि द.
नयन में सपनवां बनल बाटे पाहुन,
सनेसवा जमुनियां बदरिया से कहि द.
लिलारे चनरमा के टिकुली बा टहटह,
लुका जाय कतहूं अन्हरिया से कहि द.
न आवेले सब दिन सुहागिन ई रतिया,
तनी कोहनाइल उमिरिया से कहि द.
नयन के पोखरिया भइल बाटे लबलब,
ना झलके भरलकी गगरिया से कहि द.
amritanshuom 1:01 pm on January 10, 2011 Permalink |
काफी प्रभाव- पूर्ण आ भाव-पूर्ण रचना बा दिनेश भ्रमर जी के .
ओ.पी.अमृतांशु
santosh kumar patel 10:24 am on February 1, 2011 Permalink |
amiteshji
ram ram
bahut sundar kam raura kar rahal bani. hamar ago sujahv ba ki raura aadarniya dinesh bhramar ji ke ” vyaktitwa aa krititwa” yani uhan ke jiwan ke sathe sathe uhan ke bhojpuri me yogdan ke bare me bhi jankari eeha post karin.
uhan ke likhal kitab aa kuch sahitya se judal geet, gazal, kavita aaddi.
aego bat auri swargiya pandey ashutoshji ke bare me bhi kuchh jankari dem t niman rahi.
sadar
santosh patel
editor, bhojpuri jindagi
delhi
9868152874